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Farmani Naaz: शिव भजन गाने वाली फरमानी नाज का पलटवार- आवाज अल्लाह ने दी है, मोहम्मद रफी ने भी गाए हैं भक्ति गीत - even mohammed rafi sang bhajans says singer farmani naaz hits back on controversy for singing hindu devotional song

पिछले कुछ दिनों से मुस्लिम सिंगर फरमानी नाज सावन के महीने में अपने वायरल हुए हिंदू भजन से सुर्खियों में आ गई हैं। उनके हिंदू भजन गाए जाने से कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी बेहद नाराज हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं। अब इन कट्टरपंथियों को फरमानी नाज ने तीखा जवाब दिया है और कहा है कि बॉलीवुड के सबसे पॉप्युलर गायकों में से एक मोहम्मद रफी ने भी फिल्मों में हिदूं भक्ति गीत गाए थे और एक कलाकार का कोई धर्म नहीं होता है।

फरमानी ने किया कट्टरपंथियों पर पलटवार
हमारे सहयोगी चैनल ‘टाइम्स नाउ’ से फरमानी ने खुद की हो रही आलोचनाओं पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि मोहम्मद रफी ने भी भक्ति गीत गाए हैं। हमने मास्टर सलीम को भी ऐसे गाने गाते हुए सुना है जो लोगों के बीच बेहद पॉप्युलर हैं।’ बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रहने वाली फरमानी नाज के हिंदू भक्ति गीत ‘हर हर शंभू’ (Har Har Shambhu) सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देवबंद के उलेमाओं ने आपत्ति जताई है और कहा है कि इस्लाम में हिंदू भक्ति गीत गाना हराम है। देवबंद के उलेमाओं ने यह भी कहा है कि फरमानी को इसके लिए अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि विवाद बढ़ने पर उलेमा ने अपने बयान से किनारा करते हुए कहा कि वह केवल अपनी राय रख रहे थे कि इस्लाम में गाने-नाचने की इजाजत नहीं है।
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‘कलाकार का कोई धर्म नहीं होता’
इस मुद्दे पर Farmani Naaz ने आगे कहा कि वह एक कलाकार है और हर तरह के गाने (Farmani Naaz song) गा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘एक कलाकार का कोई धर्म नहीं होता है। मैं कव्वाली गाने के साथ ही हिंदू धार्मिक गाने भी गा सकती हूं। कोई भी कलाकार हिंदू-मुसलमान देखकर परफॉर्म नहीं करता है। जब हम गाते हैं तो यह नहीं सोचते कि यह हिंदुओं का गाना या मुसलमानों का क्योंकि गाने गाना हमारा प्रोफेशन हैं।’ फरमानी ने इस बातचीत के दौरान यह भी साफ कर दिया है कि उनके खिलाफ किसी भी तरह का कोई फतवा जारी नहीं हुआ है।
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मुफ्ती ने कहा- इस्लाम में भजन गाना हराम
बता दें कि इससे पहले मुफ्ती असद कासमी ने फरमानी नाज के बारे में कहा था कि उन्होंने जो किया है उसकी इस्लाम में माफी नहीं है। मुफ्ती ने कहा, ‘देखिए, मैं कहना चाहता हूं कि इस्लाम में नाचने-गाने की संस्कृति को आगे नहीं बढ़ाया जाता है। इस्लामी संस्कृति में इसे हराम कहा गया है। जिस लड़की ने यह गाना गाया है उसे इसके लिए अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए।’ मुफ्ती ने कहा कि फरमानी को इस्लाम से बेदखल तो नहीं किया गया है लेकिन उन्होंने ऐसा काम जरूर किया है जो हराम है और निंदनीय है, उन्हें दोबारा ऐसा नहीं करना चाहिए।
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‘आवाज अल्लाह ने दी है, भजन गाने से मुसलमान नहीं बनते’
मुफ्ती के इस बयान पह फरमानी नाज ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों के बारे में कोई बात नहीं करनी है। उन्होंने कहा, ‘यह बिल्कुल हराम नहीं है। हर कोई अपनी उसी आवाज का इस्तेमाल कर रहा है जो अल्लाह ने दी है। हम भजन गाने से कोई हिंदू नहीं बन जाते हैं। हम लोग केवल कलाकार हैं।’

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